अदृश्य साहस

नुष्य इस धरती का सबसे ताक़तवर प्राणी माना जाता है। मनुष्य के पास दिमाग है, उसके पास सोचने की शक्ति है। सिर्फ एक दिमाग के सहारे और सोच से इंसान कितने सारे गुणों और अवगुणों को अपने व्यक्तित्व में समाहित करता है। हिम्मत के साथ डर, प्यार के साथ घृणा, परवाह के साथ बेरुखी और कभी-कभी परिस्थितियों के साथ गुणों के बजाए अवगुण हावी होने लगते हैं।

अभी कुछ ही दिनों की बात थी एक presentation देना था, लेकिन उस विषय पर focus हो ही नहीं पा रहा था। सोचती रही की free mind से बैठती हूँ।  लेकिन क्या mind भी कभी विचारों या planning से फ्री होता है?

इसी उधेड़बुन में एकाएक मेरा ध्यान एक चींटी पर गया। वो अपनी ही धुन में चली जा रही थी बिलकुल सीधी लाइन में अपनी साथी चींटियों के साथ। सबने अपने वज़न से भारी कण उठा रखे थे। तभी एक झाड़ू का तिनका उनके सामने आ गया। जो झाड़ू का तिनका हमारे लिए कोई मायने नहीं रखता चींटी के लिए पहाड़ सामान था।

वो रुकी, अचानक रुकने से वो कण भी उसकी गिरफ़्त से छूटा, तिनके में पैर उलझा तो रास्ता भटक गयी, आगे मोटा, गद्दीदार पायदान रास्ता रोके खड़ा था, इतने सारे व्यवधानों के बाद भी उस चींटी की एकाग्रता नहीं टूटी। उसने जैसे-तैसे रास्ता ढूंढा और फिर उस कण को उठाया और अपनी साथी चींटियों के साथ पंक्ति में शामिल हो गयी।

आज वो नन्हीं सी चींटी एकाग्रता की परिभाषा समझा गई। हम मनुष्य हर तरह से काबिल होकर भी अपनी क़ाबिलियत पर खुद प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। Focus होना और समस्या आने पर विचलित ना होना आधी लड़ाई जीत लेने के बराबर है। मैंने भी विषय को समझा और presentation दिया।

आज हम अपने आस-पास भी इस महामारी के दौर में यही विचलित मन देख रहे हैं।  धैर्य और सावधानी ही हमारे आज के लिए हथियार हैं।

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